Tower of Silence: मुंबई के टॉवर ऑफ साइलेंस की कहानी, यहां पढ़ें

पारसी समुदाय के लोग अपनी मृतकों का अंतिम संस्कार एक विशेष रिवाज के तहत करते हैं, जिसे डख्मा (Tower of Silence) कहा जाता है।

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Tower of Silence: मुंबई (Mumbai) के व्यस्त शहर में स्थित टॉवर ऑफ साइलेंस (Tower of Silence) एक रहस्यमय और डरावनी स्थान के रूप में जाना जाता है। मालाबार हिल पर स्थित यह विशाल संरचना पारसी समुदाय की प्राचीन परंपरा आसमान में शव दाह (Sky Burial) से जुड़ी हुई है, लेकिन यह स्थान अपनी डरावनी कहानियों और अजीब घटनाओं के लिए भी प्रसिद्ध है।

पारसी समुदाय के लोग अपनी मृतकों का अंतिम संस्कार एक विशेष रिवाज के तहत करते हैं, जिसे डख्मा (Tower of Silence) कहा जाता है। इस रिवाज में मृतकों को शव दाह करने के बजाय खुले आकाश में रखा जाता है ताकि गिद्ध उनके शरीर को खा सकें। यह परंपरा जरोएस्ट्रियन धर्म से संबंधित है, जिसमें पृथ्वी और अग्नि के तत्वों का सम्मान किया जाता है, और इनसे शरीर को संपर्क में लाने से इन तत्वों का अपवित्र होना माना जाता है। हालांकि, इस परंपरा में आधिकारिक रूप से कोई बुराई नहीं है, लेकिन टॉवर ऑफ साइलेंस को लेकर कई डरावनी और रहस्यमयी घटनाओं के किस्से हैं जो अब तक सुनाए जाते रहे हैं।

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रहस्यमय घटनाएँ: टॉवर ऑफ साइलेंस की भूतिया कहानी
टॉवर ऑफ साइलेंस के बारे में अजीब और डरावनी कहानियाँ काफ़ी समय से चल रही हैं। कई लोग बताते हैं कि इस क्षेत्र के आसपास अजीब घटनाएँ घटती हैं। कुछ लोगों ने बताया है कि वे रात के समय टॉवर के पास गए तो अचानक ठंडक का एहसास हुआ, या फिर उन्हें कुछ अजीब आवाज़ें सुनाई दीं। कुछ लोगों ने तो यहां पर भूतिया गतिविधियों का अनुभव किया है, जैसे कि आकाश में रहस्यमयी रोशनियाँ या अज्ञात आकृतियों का दिखाई देना। एक प्रसिद्ध डरावनी घटना उस लड़की की है जो रात के समय टॉवर के पास गई थी और अचानक गायब हो गई। कुछ हफ्तों बाद, उसका शव पास के क्षेत्र में पाया गया, लेकिन शरीर की स्थिति ऐसी थी कि वह देखकर कोई भी चौंक सकता था। शरीर अजीब तरीके से मुड़ा हुआ था और उसके चेहरे पर एक भयावह अभिव्यक्ति थी। स्थानीय लोग मानते हैं कि टॉवर के पास कुछ अदृश्य शक्ति या आत्माएँ हैं जो लोगों को नुकसान पहुंचाती हैं।

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एक पूजनीय स्थान और डर का मिश्रण
पारसी समुदाय के लिए, टॉवर ऑफ साइलेंस एक पवित्र स्थल है जहां मृतकों को प्राकृतिक रूप से अंतिम संस्कार के लिए रखा जाता है। यहां पर, शवों को गिद्धों द्वारा खाया जाता है, और यह प्रक्रिया पवित्र मानी जाती है। लेकिन जैसे-जैसे शहर का विस्तार हुआ और प्रदूषण बढ़ा, गिद्धों की संख्या घटने लगी, जिससे टॉवर के रहस्यमय माहौल में और बढ़ोतरी हुई। कुछ लोग मानते हैं कि टॉवर अब केवल एक पुरानी परंपरा नहीं रह गया है, बल्कि यह एक भयावह स्थान बन चुका है जहां कोई अदृश्य शक्ति लोगों को नुकसान पहुंचाती है। आसपास की जगह में कुछ असामान्य घटनाएँ देखी जाती हैं, और यह विश्वास करने वालों के लिए यह स्थान एक डरावनी मील का पत्थर बन गया है।

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पारसी समुदाय की प्राचीन परंपरा का प्रतीक
टॉवर ऑफ साइलेंस मुंबई का एक ऐतिहासिक और रहस्यमय स्थल है, जो पारसी समुदाय की प्राचीन परंपरा का प्रतीक है। हालांकि यह एक पवित्र स्थल है, इसके साथ जुड़ी डरावनी और रहस्यमयी कहानियाँ इस स्थान को एक भूतिया छवि देती हैं। कुछ लोग इसे एक धार्मिक और आध्यात्मिक स्थल मानते हैं, जबकि अन्य इसे भूत-प्रेतों और अदृश्य शक्तियों से भरा एक डरावना स्थल मानते हैं। मुंबई में लगातार बढ़ते शहरीकरण और विकास के बावजूद, टॉवर ऑफ साइलेंस अपनी प्राचीन परंपरा और डरावनी कथाओं के साथ आज भी खड़ा है, एक ऐसा स्थान जहां पर विश्वास और डर का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है।

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