Varanasi: चैत्र नवरात्र(Chaitra Navratri) के चौथे दिन 2 अप्रैल को उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर(Gyanvapi Complex) स्थित माता श्रृंगार गौरी(Mata Shringar Gauri) के दर्शन पूजन(Darshan Puja) के लिए विभिन्न संगठनों के साथ श्रद्धालु महिलाओं का हुजूम(Crowd of devout women) उमड़ पड़ा। वर्ष में सिर्फ एक दिन के लिए खुलने वाले माता के दरबार में दर्शन पूजन के लिए मां श्रृंगार गौरी केस की वादिनी महिलाओं व हिंदू पक्ष के पैरोकार,अधिवक्ताओं के साथ ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद के कार्यकर्ता भी पहुंचे। दरबार में श्रद्धालु महिलाओं ने विधि विधान से माता का दर्शन कर श्रृंगार सामग्री अर्पित कर उनसे सौभाग्य का आर्शीवाद मांगा। इसके पहले वादिनी महिलाओं के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के नेतृत्व में मैदागिन स्थित गोरखनाथ मठ मां श्रृंगार गौरी की पूजा के लिए शोभायात्रा यात्रा निकाली गई। इसमें चारों वादिनी महिलाएं भी शामिल हुई।
न्यायालय में जीत की कामना
श्रृंगार गौरी केस के मुख्य अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने पत्रकारों को बताया कि हम मां श्रृंगार गौरी के दर्शन के लिए जा रहे हैं। उनके चरणों में हम कामना करेंगे कि जो न्यायालय में संघर्ष चल रहा है, उसमें विजय प्रदान करें। इसी क्रम में ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद के जत्थे ने भी माता रानी की आरती उतारी। इस दाैरान ज्ञानवापी परिसर में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए। श्रद्धालुओं को सत्यनारायण मंदिर और विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर चार-बी से सुबह 8.30 बजे से प्रवेश दिया गया। दर्शन पूजन में महिला दर्शनार्थियों को वरीयता दी गई, जिससे उनकी लाइन आगे रही। ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद के बैनर तले श्रद्धालुओं का दल कलश में गंगा जल लेकर मंदिर में पहुंचा। ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी उद्घोष, शंखनाद, डमरू वादन और मंत्रोच्चार से पूरा धाम परिक्षेत्र गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने मां श्रृंगार गौरी की प्राचीन प्रतिमा के टूटे पत्थरों पर सिंदूर और चंदन का लेपन किया। इसके बाद पुष्प और नैवेद्य अर्पित किया। पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के साथ माता की आराधना की।
उमड़े भक्तगण
इसी क्रम में चौक चित्रा सिनेमा के पास से भी श्रद्धालुओं की भीड़ गुलशन कपूर के नेतृत्व में दर्शन पूजन के लिए ज्ञानवापी पहुंचा। श्रद्धालु हाथों में पूजन सामग्री, माला फूल, ध्वज लेकर दरबार में पहुंचे। श्रद्धालुओं ने ज्ञानवापी कूप के जल से माता के विग्रह को स्नान कराया। फिर गुलाब, अड़हुल, बेला के फूलों से श्रृंगार कर माता को सिन्दूर अर्पित किया। इसके बाद माता रानी से भव्य मंदिर बनने की गुहार लगाई। माता श्रृंगार गौरी के दर्शन के बाद दल ने ज्ञानवापी कूप के जल से काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक किया। माता अन्नपूर्णा और ढ़ुढ़ीराज गणेश का दर्शन कर जत्थे ने ज्ञानवापी परिसर में सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ कर दर्शन पूजन यात्रा को विराम दिया और वापस अपने घरों को लौटे।
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इसके पहले 1 अप्रैल की शाम को श्री काशी विश्वनाथ धाम के सभागार में ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद की बैठक हुई। इसमें माता श्रृंगार गौरी के दर्शन पूजन कार्यक्रम, ज्ञानवापी व्यास जी तहखाना और बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन की रूप रेखा बनी। इस बैठक में काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र, मंदिर के डिप्टी एसडीएम शंभू शरण, पुलिस उपायुक्त, ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद से डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्र, अधिवक्ता अनघ शुक्ल, पतंजलि पांडेय आदि की उपस्थिति रहीं।
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