Lok Sabha: लोकसभा में वक्फ बोर्ड बिल के मसले पर शिवसेना उद्धव गुट असमंजस में दिखाई दिया। शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के सांसद अरविंद सावंत ने ना बिल का समर्थन किया और ना ही खुलकर विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि संयुक्त संसदीय समिति में बिल पर सही से चर्चा तक नहीं हुई।
कथनी और करनी में बहुत फ़र्कः अरविंद सावंत
अरविंद सांवत ने लोकसभा में बोलते हुए कहा कि , “मेरे मित्र रिजिजू ने बहुत कुछ कहा। सबसे बड़ी बात है कि मैं ख़ुद भी संयुक्त संसदीय समिति में था और दुर्भाग्य की बात है कि संयुक्त संसदीय समिति में आख़िर तक सही से चर्चा नहीं हुई। क्योंकि संयुक्त संसदीय समिति में नॉन स्टेक होल्डर्स को भी बुलाया जाता था। अब ऐसी स्थिति में आप बिल लाते हो तो आपका उद्देश्य क्या है? हर समय हमें महसूस हुआ है कि आप लोगों की कथनी और करनी में बहुत फ़र्क होता है।”
स्टैंड स्पष्ट नहीं होने पर सवाल
हालांकि टूबीटी सांसद ने बिल के समर्थन या विरोध में कुछ भी नहीं कहा। उनकी बातों से तो लग रहा था कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना बिल का विरोध कर रही है, लेकिन उनके द्वारा यह स्पष्ट नहीं किये जाने पर सवाल उठ रहा है।
उग्र विचारधारा से असमंजस की स्थिति तक
शिवसेना की विचारधारा उग्र हिंदुत्ववादी की रही है। 1980 के दशक से शिवसेना एक उग्र हिंदुत्ववादी विचारधारा वाली राजनीतिक पार्टी में परिवर्तित हो गई। 1984 के भिवंडी दंगों और 1992-93 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद हुए दंगों के दौरान शिवसेना का का मुस्लिम विरोधी रुख स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। हिंदू हृदय सम्राट बाला साहब ठाकरे ने खुले तौर पर स्वीकार किया था कि शिवसेना ने विवादित मस्जिद के विध्वंस में भूमिका निभाई।
Madhya Pradesh:दो खूंखार महिला नक्सली ढेर, दाेनाें पर था ‘इतने’ का इनाम
केंद्रीय गृह मंत्री ने बताई आंकड़ों से सच्चाई
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बोलते हुए जानकारी दी कि1913 से 2013 तक वक्फ बोर्ड के अधीन 18 लाख एकड़ जमीन थी, लेकिन 2013-2025 तक 21 लाख एकड़ अतिरिक्त जमीन जोड़ी गई है। अमित शाह ने कहा, “विपक्ष इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह कर रहा है।”