Maharashtra: 5 दिसंबर को शपथ ग्रहण की तारीख तय, कौन होगा मुख्यमंत्री इसका इंतजार

भाजपा की जीत के नायक देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व से एकनाथ शिंदे और अजीत पवार के साथ-साथ भाजपा के कई नेता भी बेचैन हो गए‌ है।

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Maharashtra: महाराष्ट्र (Maharashtra) में प्रचंड जनादेश के बावजूद भाजपा (BJP) अपना मुख्यमंत्री (Chief Minister) तय नहीं कर पाई है। गठबंधन की राजनीति (Coalition Politics) के इस दौर में सवाल खड़ा हो रहा है कि सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद भाजपा को कार्यवाहक मुख्यमंत्री (Acting Chief Minister) एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) की शर्तों को मानना क्या जरुरी हो गया है।

भाजपा की जीत के नायक देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व से एकनाथ शिंदे और अजीत पवार के साथ-साथ भाजपा के कई नेता भी बेचैन हो गए‌ है। जनीतिक हलकों में महायुति गठबंधन द्वारा सरकार बनाने की देरी के लिए इसको जिम्मेदार माना जा रहा।

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क्यों हो रही है देरी?
गठबंधन के इस दौर में इस तरह की असमंजस की स्थिति बनी रहती है। लेकिन जिस तरह की अप्रत्याशित जीत महायुति गठबंधन ने महाराष्ट्र में हासिल की है। उसके बाद इसकी उम्मीद नहीं की जा रही थी। नई सरकार के गठन में हो रही देरी से जनता के बीच महायुति के घटक दलों में आपसी विश्वास की कमी का संदेश जा रहा है। सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर भाजपा की स्थिति असहज हो रही है। महा विकास आगाड़ी के नेताओं को भी टीका टिप्पणी का मौका मिल रहा है।

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सबका साथ, सब का विश्वास
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के निर्णय को मानते हुए एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में उपमुख्यमंत्री का पद स्वीकार करके राजनीति में एक नई मिसाल कायम की है। भाजपा की शानदार जीत में देवेंद्र फडणवीस का एक अहम रोल है। फिर भी भाजपा के लिए सबको साथ लेना और सबका विश्वास हासिल करते हुए आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है। ‌ आगामी मुंबई महानगरपालिका के चुनाव तय करेंगे कि मुंबई में किसका दबदबा रहेगा मुंबई और ठाणे में शिंदे के प्रभाव को देखते हुए भाजपा उन्हें दूर करके उद्धव ठाकरे की शिवसेना को जड़े मजबूत करने का मौका नहीं देना चाहेगी।

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एकनाथ शिंदे पर सब की नजर
कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जिस तरह से अपनी मांगे रखी उसका असर भाजपा और शिंदे अच्छा के संबंधों पर पड़ना अच्छा संकेत नहीं है। भाजपा और अजीत पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भाजपा के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। उसमें एकनाथ शिंदे कोई भी फैसला करें भाजपा नेतृत्व का सिर दर्द नहीं बन सकते।

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