Sarnath: भारत का प्राचीन नगर वाराणसी न केवल हिंदू धर्म के लिए बल्कि बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। वाराणसी से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित सारनाथ बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केंद्र है।
यह वही स्थान है जहां भगवान गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था, जिसे “धर्मचक्र प्रवर्तन” कहा जाता है। यही कारण है कि यह स्थान दुनियाभर के बौद्ध अनुयायियों के लिए अत्यंत श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।
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सारनाथ का ऐतिहासिक महत्व
सारनाथ का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है। यह स्थान बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है। बुद्ध ने यहाँ अपने पहले पांच शिष्यों को उपदेश दिया था, जिससे बौद्ध संघ की स्थापना हुई। इसके अलावा, सम्राट अशोक ने यहाँ कई स्तूपों और स्तंभों का निर्माण करवाया, जिनमें अशोक स्तंभ विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
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प्रमुख आकर्षण
- धमेक स्तूप– यह स्तूप सारनाथ का सबसे प्रमुख स्मारक है। यह वही स्थान माना जाता है जहां बुद्ध ने पहला उपदेश दिया था। इसकी ऊँचाई लगभग 43.6 मीटर है और इस पर बारीक नक्काशी की गई है।
- अशोक स्तंभ– मौर्य सम्राट अशोक द्वारा निर्मित यह स्तंभ बौद्ध धर्म के प्रसार का प्रतीक है। इसके शीर्ष पर चार शेरों की मूर्ति बनी हुई है, जिसे भारत सरकार ने अपने राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया है।
- मुलगंध कुटी विहार– यह एक प्रमुख बौद्ध मंदिर है, जिसे महाबोधि सोसाइटी द्वारा बनवाया गया था। यहाँ बुद्ध की एक भव्य मूर्ति स्थापित है और दीवारों पर उनके जीवन की झलकियां चित्रित की गई हैं।
- सारनाथ पुरातात्विक संग्रहालय– इस संग्रहालय में बौद्ध धर्म से जुड़ी कई प्राचीन मूर्तियाँ और अवशेष संजोए गए हैं। यहाँ प्रसिद्ध अशोक स्तंभ का मूल शीर्ष भी रखा गया है।
- चौखंडी स्तूप– यह वह स्थान माना जाता है जहां बुद्ध अपने पहले पांच शिष्यों से मिले थे। बाद में मुगल सम्राट अकबर ने इस स्तूप का पुनर्निर्माण कराया।
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बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक पवित्र स्थल
सारनाथ न केवल भारतीय बौद्ध अनुयायियों के लिए बल्कि नेपाल, थाईलैंड, जापान, श्रीलंका, तिब्बत, म्यांमार और अन्य देशों के बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए भी महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। यहाँ विभिन्न देशों द्वारा बनवाए गए बौद्ध मंदिर इस स्थान की वैश्विक पहचान को दर्शाते हैं।
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बौद्ध धर्म का एक ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र
सारनाथ बौद्ध धर्म का एक ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र है। यह स्थान केवल इतिहासकारों और श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझना चाहते हैं। अगर आप वाराणसी जाते हैं, तो सारनाथ की यात्रा अवश्य करें, क्योंकि यह आपको अध्यात्म, इतिहास और शांति का अद्भुत अनुभव प्रदान करेगा।
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