Tariff War: भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के पीछे 4 कारण, जानिए क्या हैं वो

सूचकांकों में आई इस गिरावट का नतीजा यह हुआ कि निवेशकों को एक दिन में कुल 10 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

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वैश्विक अस्थिरता (Global Instability) का असर भारतीय शेयर बाजारों (Indian Stock Markets) पर भी पड़ा और शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार के निफ्टी (Nifty) और सेंसेक्स (Sensex) दोनों सूचकांकों में 1.5 फीसदी की गिरावट (Fall) आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने 2 अप्रैल को दुनिया भर के विभिन्न देशों पर आयात शुल्क लगा दिया। उन्होंने भारत पर 26 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इसका स्पष्ट असर शेयर बाजार पर देखा जा रहा है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (Bombay Stock Exchange) का सेंसेक्स 1.22 प्रतिशत या 932 अंक गिरकर 75,364 पर बंद हुआ। निफ्टी सूचकांक 346 अंक गिरकर 22,904 अंक पर बंद हुआ।

सूचकांकों में आई इस गिरावट का नतीजा यह हुआ कि निवेशकों को एक दिन में कुल 10 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। आइये इस गिरावट के पीछे के 4 महत्वपूर्ण कारणों को जानें।

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आयात शुल्क में वृद्धि से व्यापार युद्ध की आशंका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल को नए आयात शुल्क बढ़ोतरी को लागू किया। चीन से अमेरिका में आयात होने वाले सामानों पर सबसे अधिक 36 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा। और इसके बाद भारत पर 26 प्रतिशत आयात शुल्क लगा दिया गया है। इसी प्रकार के टैरिफ यूरोपीय देशों, यूनाइटेड किंगडम और अन्य एशियाई देशों पर भी लगाए गए हैं। ऐसी स्थिति में इस बात की संभावना बहुत कम है कि यह देश स्वस्थ रह सकेगा। यदि ये देश अमेरिकी वस्तुओं पर नये टैरिफ लगाकर जवाबी कार्रवाई करते हैं, तो वैश्विक व्यापार युद्ध में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है। और इससे मुद्रास्फीति भी बढ़ सकती है। ऐसे में बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। और इसका असर शेयर बाजार पर दिख रहा है।

वैश्विक बाजार में मंदी
यहां तक ​​कि अमेरिकी बाजार भी इस समय मंदी में हैं। अमेरिकी शेयर बाजारों ने भी शुक्रवार को 2020 कोविड मंदी के बाद अपना सबसे खराब दिन देखा। कहा जा रहा है कि वॉल स्ट्रीट पर 2.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर नष्ट हो गए हैं। यूरोप और जापान के शेयर बाजारों में भी स्थिति अलग नहीं थी। अमेरिकी ट्रेजरी बांड और सोने में निवेश भी बाजार की अस्थिरता को उजागर करता है। इस गिरावट को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।

भारतीय फार्मा उद्योग पर आयात शुल्क बढ़ाने की कुल्हाड़ी
2 अप्रैल को ट्रम्प की घोषणा में जानबूझकर फार्मा या दवा कंपनियों को बाहर रखा गया। लेकिन, उनका एक वाक्य सबको याद है। “हम फार्मा के बारे में अलग ढंग से सोचेंगे।” ट्रम्प ने कहा, “और हम आने वाले दिनों में उन उत्पादों पर आयात शुल्क के बारे में निर्णय लेंगे।” इस बयान से भारतीय फार्मा कंपनियों में खलबली मच गई है। क्योंकि, डॉ. अमेरिका रेड्डीज, सन फार्मा और अरबिंदो फार्मा का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इन कंपनियों के उत्पाद बड़े पैमाने पर संयुक्त राज्य अमेरिका को निर्यात किए जाते हैं। आने वाले दिनों में उन्हें भारी नुकसान हो सकता है। इसलिए पिछले दो दिनों में फार्मा कंपनियों के शेयरों में 5 से 10 फीसदी तक की गिरावट आई है। और इसका असर भारतीय बाज़ारों पर पड़ रहा है।

बड़ी कंपनियों में गिरावट
निफ्टी 50 में शामिल कंपनियों के शेयरों में गिरावट एक और महत्वपूर्ण कारण है। क्योंकि इसका सीधा असर सूचकांक पर पड़ता है। रिलायंस बाजार में एक विशाल स्टॉक है। लेकिन, इसमें भी बड़ी बाधा आई है। फार्मा, धातु, ऑटोमोबाइल उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट आई है। इसलिए, ये सूचकांक भी नीचे आ गये हैं। (Tariff War)

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