ABVP: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के राष्ट्रीय सचिव श्रवण बी राज और शिवांगी खारवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने 2 अप्रैल को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट कर हैदराबाद विश्वविद्यालय की 400 एकड़ भूमि के अतिक्रमण और नीलामी के गंभीर मुद्दे पर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार से इस भूमि को बचाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप कर विश्वविद्यालय को उसका अधिकार वापस दिलाने की मांग की है।
तेलंगाना सरकार की मनमानी
इस संदर्भ में अभाविप ने एक प्रेस वार्ता आयोजित कर तेलंगाना सरकार की मनमानी और छात्रों की आवाज को दबाने के प्रयासों की कड़ी निंदा की। परिषद ने स्पष्ट किया कि शिक्षा और अनुसंधान के लिए समर्पित इस भूमि का निजी कंपनियों को सौंपा जाना न केवल अनुचित और निंदनीय है बल्कि इससे क्षेत्र की पारिस्थितिकी संतुलन को भी गहरी क्षति पहुंचेगी। यह भूमि न केवल शैक्षिक महत्व रखती है, बल्कि अपने समृद्ध जैवविविधता के कारण एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय धरोहर भी है। यहां अनेक दुर्लभ प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है, जिनके अस्तित्व पर संकट मंडराएगा। इस भूमि का विनाश जैविक तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा, जिससे जलवायु संतुलन, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय स्थिरता पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
यह मात्र भूखंड नहीं…
हैदराबाद विश्वविद्यालय की यह भूमि केवल एक भूखंड नहीं बल्कि एक शैक्षणिक और पारिस्थितिक धरोहर है, जिसे किसी भी स्थिति में नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। जब अभाविप कार्यकर्ताओं और छात्र समुदाय ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई तो तेलंगाना पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति के बिना जबरन परिसर में घुसकर छात्रों को गिरफ्तार कर लिया। यह न केवल छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है बल्कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर भी सीधा प्रहार है। अभाविप ने मांग की कि केंद्र सरकार हस्तक्षेप कर इस 400 एकड़ भूमि को तुरंत विश्वविद्यालय को लौटाए और पूरे 2320 एकड़ भूमि का आधिकारिक हस्तांतरण सुनिश्चित करे, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार के अतिक्रमण की संभावना समाप्त हो सके।
छात्रों के अधिकारों पर कुठाराघात
इस विषय पर अभाविप की राष्ट्रीय मंत्री शिवांगी खारवाल ने कहा कि हैदराबाद विश्वविद्यालय की भूमि राष्ट्र की शैक्षिक और पर्यावरणीय धरोहर है, इसे निजी कंपनियों को सौंपना छात्रों के अधिकारों पर कुठाराघात है। अभाविप कोई समझौता नहीं करेगी और यदि आवश्यक हुआ, तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन भी करेगी।
भूमि पर अतिक्रमण किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं
अभाविप के राष्ट्रीय मंत्री श्रवण बी. राज ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की भूमि पर अतिक्रमण किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। विश्वविद्यालयों की भूमि का उद्देश्य केवल शिक्षा और शोध होना चाहिए, न कि व्यावसायिक मुनाफे के लिए नीलामी। हम इस अन्याय के खिलाफ छात्रों को संगठित कर संघर्ष को और तेज करेंगे और हर संभव कदम उठाएंगे जिससे विश्वविद्यालय को उसका अधिकार मिले। हमने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को ज्ञापन सौंपा, तो उन्होंने आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर समाधान की मांग की गई है और केंद्र सरकार जल्द ही ठोस कदम उठाएगी।अभाविप देशभर के छात्र समुदाय से इस भूमि रक्षा आंदोलन में समर्थन देने की अपील करती है।