लोकसभा (Lok Sabha) के बाद वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill) राज्यसभा (Rajya Sabha) में भी पारित हो गया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू (Union Minority Affairs Minister Kiren Rijiju) ने वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया। लोकसभा में विधेयक पारित होने के बाद सबकी निगाहें राज्यसभा पर टिक गईं। हालांकि, लोकसभा के बाद वक्फ विधेयक राज्यसभा में भी पारित हो गया।
यह विधेयक लोकसभा में 12 घंटे की गरमागरम बहस के बाद पारित हो गया। देर आधी रात को लोकसभा में विधेयक के पक्ष में 288 वोट पड़े। विधेयक के विरोध में 232 वोट पड़े। अब लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी वक्फ संशोधन विधेयक को हरी झंडी मिल गई है। स्पीकर जगदीप धनखड़ के अनुसार विधेयक के पक्ष में 128 वोट पड़े। इसके विरोध में 95 वोट पड़े।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी का इंतजार
विपक्षी सांसदों द्वारा दिए गए कई सुझावों को अस्वीकार कर दिया गया। राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर गुरुवार दोपहर एक बजे चर्चा शुरू हुई। लगभग 13 घंटे की गरमागरम बहस के बाद विधेयक पारित कर दिया गया। विधेयक राज्यसभा में पारित होने के बाद अब इसे आगे की मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक कानून बन जाएगा।
वक्फ क्या है?
अल्लाह के नाम पर दी गई कोई वस्तु या दान वक्फ को दे दिया जाता है। इसमें चल एवं अचल संपत्ति शामिल है। देश का कोई भी मुस्लिम व्यक्ति अपनी संपत्ति वक्फ बोर्ड को दान कर सकता है। वक्फ बोर्ड उस संपत्ति का प्रबंधन करता है।
वक्फ संशोधन विधेयक में वास्तव में क्या है?
वक्फ बोर्ड की प्रबंधन समिति में एक मुस्लिम सदस्य का होना अनिवार्य था। हालांकि, संशोधित वक्फ बोर्ड विधेयक में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे पहले सरकार द्वारा वक्फ बोर्ड में कुल 4 सदस्यों की नियुक्ति की गई थी। इसके अलावा, 4 सदस्यों का चुनाव भी किया जा रहा था।
अब नए विधेयक में वक्फ के 8 सदस्यों में से कम से कम 2 गैर-मुस्लिम होंगे। इससे पहले, न्यायाधिकरण का निर्णय वक्फ बोर्ड के लिए अंतिम होता था। न्यायाधिकरण के निर्णय को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकी। अब वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक के अनुसार, विवादित वक्फ संपत्तियों के खिलाफ उच्च न्यायालय में मामला जाना संभव हो सकेगा।
वक्फ बोर्ड का मस्जिद की भूमि या मुस्लिम धर्म के प्रयोजनों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली किसी भी संपत्ति पर दावा होता था। लेकिन नए विधेयक में अब भूमि दान नहीं की जाएगी। इसके अलावा, यदि उस पर कोई मस्जिद है तो वह संपत्ति वक्फ बोर्ड की नहीं होगी। इससे पहले, आयुक्त के पास संपत्तियों का सर्वेक्षण करने का अधिकार था। लेकिन अब नए विधेयक में जिला कलेक्टर वक्फ भूमि का सर्वेक्षण करेंगे।
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