Avalanche: भारत-चीन सीमा पर उत्तराखंड में जोशीमठ के माणा क्षेत्र में 28 नवंबर को हुए हिमस्खलन से सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का जीआरईएफ कैंप ध्वस्त हुआ है। बीआरओ में भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को इसी कैंप में बुलाया जाता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्थिति के बारे में मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से बात की है। उन्होंने बताया कि प्रशासन प्रभावितों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है। भारतीय सेना ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है और सेना की स्थानीय इकाइयों ने बचाव कार्य चलाया है। सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके फंसे हुए कर्मियों को बचाने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने ली मुख्यमंत्री से जानकारी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से घटना के बारे में जानकारी लेने के बाद बताया कि माणा क्षेत्र में आज हुए दुर्भाग्यपूर्ण हिमस्खलन से बीआरओ का जीआरईएफ कैंप ध्वस्त हुआ है। स्थिति के बारे में मुख्यमंत्री धामी ने उन्हें अवगत कराया है कि प्रशासन प्रभावितों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है। सेना की स्थानीय इकाइयों ने भी बचाव कार्य चलाया है। सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके फंसे हुए कर्मियों को बचाने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं। क्षेत्र में भारी बर्फबारी जारी है और जीआरईएफ जोशीमठ और माणा के बीच सड़क को साफ करने का काम कर रहा है। बचाव और चिकित्सा सहायता में सहायता के लिए जोशीमठ से अतिरिक्त चिकित्सा संसाधन भेजे जा रहे हैं।
10 में से चार कर्मियों की हालत गंभीर
सेना के मध्य क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालने वाली सूर्या कमांड ने बताया कि 28 फरवरी को सुबह करीब 07:15 बजे माणा क्षेत्र और बद्रीनाथ के बीच स्थित एक बीआरओ लेबर कैंप हिमस्खलन की चपेट में आ गया, जिससे 57 श्रमिक आठ कंटेनरों और एक शेड के अंदर दब गए। भारतीय सेना की त्वरित प्रतिक्रिया टीमों में आईबेक्स ब्रिगेड के 100 से अधिक कर्मियों को तुरंत तैनात किया गया, जिसमें डॉक्टर, एम्बुलेंस और प्लांट उपकरण शामिल थे। सुबह 11:50 बजे तक टीमों ने पांच कंटेनरों का पता लगाकर 10 मजदूरों को सफलतापूर्वक बचा लिया, जो सभी जीवित थे। बचाए गए 10 में से चार कर्मियों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
भारी बर्फबारी
सूर्या कमांड ने बताया कि गढ़वाल सेक्टर के माणा गांव के पास जीआरईएफ कैंप पर हिमस्खलन की जगह गढ़वाल 9वीं ब्रिगेड और बीआरओ ने बचाव अभियान चलाया है, जिसमें एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, जिला प्रशासन, आईटीबीपी की टीमें शामिल हैं। अभी भी कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। भारी बर्फबारी और मामूली हिमस्खलन के बावजूद भारतीय सेना की आईबेक्स ब्रिगेड ने तेजी से बचाव अभियान शुरू किया है। अब तक बचाए गए 10 कर्मियों को सेना ने चिकित्सा सहायता प्रदान की है। इसके अतिरिक्त सैनिकों और उपकरणों को घटनास्थल पर भेजा जा रहा है। शेष तीन कंटेनरों के लिए खोज अभियान जारी है, जिसका उद्देश्य फंसे हुए व्यक्तियों को बचाना है।
23 बटालियन माणा में तैनात
बचाव अभियान में लगे आईटीबीपी कमांडेंट पीयूष पुष्कर ने कहा कि आईटीबीपी की 23 बटालियन माणा में तैनात हैं, जिसमें 89-90 जवान हैं। पिछले दो दिनों से इस इलाके में मौसम खराब है। आज सुबह से ही इलाके में भारी बर्फबारी हो रही है। इस वजह से इलाके में हिमस्खलन हुआ, जिससे वहां बीआरओ कैंप को नुकसान पहुंचा है। अब तक 10 लोगों को बचाया जा चुका है, जिनका इलाज आईटीबीपी और सेना के एमआई कक्षों में चल रहा है। बचाए गए लोगों को मामूली या गंभीर चोटें आई हैं, जिनका इलाज किया जा रहा है। आईटीबीपी के जवान चमोली जिले के हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्र में बचाव अभियान चला रहे हैं। खराब मौसम की चुनौतियों के बावजूद फंसे हुए बाकी मजदूरों को खोजने और निकालने के प्रयास जारी हैं।