Jammu and Kashmir: पूर्व मंत्री और डोगरा सदर सभा के अध्यक्ष गुलचैन सिंह चाड़क(Former Minister and President of Dogra Sadar Sabha Gulchain Singh Chadak) ने अनुच्छेद 370(Article 370) को निरस्त करने पर सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) के फैसले का 10 दिसंबर को स्वागत किया है। यहां जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि शीर्ष न्यायालय के फैसले ने इस संबंध में सभी संभावित वैकल्पिक विचार प्रक्रियाओं पर विराम लगा दिया है और केंद्र शासित प्रदेश(Union Territories) के भारत संघ में एकीकरण को मजबूत किया है।
जम्मू-कश्मीर रियासत का भारत में हुआ था विलय
चाड़क ने कहा कि जम्मू-कश्मीर रियासत का भारत में विलय वास्तव में अक्टूबर 1947 में हुआ था, जब महाराजा हरि सिंह(Maharaja Hari Singh) ने अन्य सभी मामलों की तरह सत्ता की बागडोर केंद्र सरकार को हस्तांतरित करते हुए 562 राज्यों की तरह विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि बाद में भारत के संविधान में 370 के अस्थायी अनुच्छेद को शामिल करने से विलय कुछ हद तक कमजोर हो गया और कई अन्य समस्याओं का कारण भी बन गया।
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सरकार से केंद्र शासित प्रदेश के लोगों के हितों की रक्षा के लिए की ये मांग
पूर्व मंत्री और डोगरा सदर सभा के अध्यक्ष गुलचैन सिंह चाड़क ने सरकार से केंद्र शासित प्रदेश के लोगों के हितों की रक्षा के लिए कानून में सुरक्षा उपाय स्थापित करने का आग्रह किया, जैसे कि हिमाचल प्रदेश राज्य में हिमाचल प्रदेश किरायेदारी और भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 के तहत है जो कि राज्य के बाहर के व्यक्तियों पर कृषि भूमि खरीदने पर कुछ प्रतिबंध लगाता है या जम्मू-कश्मीर के लोगों की स्थितियों और परिस्थितियों के लिए उपयुक्त कोई अन्य कानून हो।