सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 3 अप्रैल को दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में पटाखों (Firecrackers) के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर प्रतिबंध एक साल के लिए बढ़ा दिया। न्यायमूर्ति अभय एस. ओका (Justice Abhay S. Oka) और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां (Justice Ujjal Bhuyan) की पीठ ने कहा कि वायु प्रदूषण (Air Pollution) का स्तर लंबे समय से खतरनाक बना हुआ है।
इस मामले में सुनवाई के दौरान मौजूद इंजीनियर मुकेश जैन ने कहा कि पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला सही नहीं है। आतिशबाजी से पर्यावरण स्वच्छ होता है। उन्होंने तर्क दिया कि आतिशबाजी पर प्रतिबंध एक अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा था। 12 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने पूरे साल के लिए दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था।
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जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा सड़क मार्ग से यात्रा करता है। पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में हर कोई अपने घर या कार्यालय में एयर प्यूरीफायर नहीं लगा सकता। न्यायालय ने कहा है कि जब तक न्यायालय इस बात से संतुष्ट नहीं हो जाता कि हरित पटाखों से प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आती है, तब तक पिछले आदेशों पर पुनर्विचार करने का कोई सवाल ही नहीं है।
कोर्ट ने इंजीनियर को चेतावनी दी
सुनवाई के दौरान मुकेश जैन नामक एक इंजीनियर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने इस मामले पर अपनी राय व्यक्त करने की अनुमति मांगी थी। अदालत से अनुमति मिलने के बाद उन्होंने पटाखों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का विरोध किया। इस पर न्यायमूर्ति ओका ने पूछा, “क्या आप विशेषज्ञ हैं?” मुकेश ने जवाब दिया- हां, मैं आईआईटी से शिक्षित इंजीनियर हूं। मुकेश ने प्रसिद्ध पर्यावरणविद् एमसी मेहता पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा- मेहता देश विरोधी संगठनों से फंड लेता है। कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा कि इस व्यक्ति को यह नहीं पता कि एमसी मेहता कौन हैं और उन्होंने पर्यावरण के लिए कितना काम किया है। हम मुकेश जैन पर जुर्माना लगा सकते थे, लेकिन इस बार हम उन्हें चेतावनी देकर छोड़ रहे हैं।
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