कैबिनेट मंत्री बनाम डिप्टी सीएम: कौन ज्यादा ताकतवर? जानें पावर, पद और महत्व

भारतीय राजनीति में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के पदों की खूब चर्चा होती है, लेकिन जब बात डिप्टी सीएम यानी उपमुख्यमंत्री की आती है

तो अक्सर लोग भ्रमित हो जाते हैं कि क्या डिप्टी सीएम, कैबिनेट मंत्री से बड़ा पद होता है? क्या इनके अधिकार अलग होते हैं? और संविधान में इस पद का क्या जिक्र है? इस लेख में हम इन्हीं सवालों के जवाब देंगे।

– भारतीय संविधान में डिप्टी सीएम पद का कोई उल्लेख नहीं है। – आर्टिकल 163 और 164 में मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद की नियुक्ति का उल्लेख है, लेकिन डिप्टी सीएम के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है।

डिप्टी सीएम की नियुक्ति पूरी तरह से राजनीतिक निर्णय होता है, जो सत्ता संतुलन और गठबंधन सहयोगियों को खुश रखने के लिए किया जाता है।

कैसे बनते हैं डिप्टी सीएम? – डिप्टी सीएम की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल करते हैं। – आमतौर पर सबसे वरिष्ठ विधायक या गठबंधन के प्रमुख नेता को यह पद दिया जाता है। – यह एक प्रतीकात्मक पद होता है, जिसका उद्देश्य विभिन्न समुदायों या पार्टियों का समर्थन बनाए रखना होता है।

कैबिनेट मंत्री बनाम डिप्टी सीएम: कौन ज्यादा ताकतवर? – डिप्टी सीएम पद अधिक राजनीतिक होता है, जबकि कैबिनेट मंत्री के पास कार्यकारी शक्तियां होती हैं। – अगर डिप्टी सीएम के पास वित्त, गृह जैसे बड़े मंत्रालय हैं तो उनकी ताकत ज्यादा मानी जाती है। – परंतु निर्णय लेने में मुख्यमंत्री ही सर्वोच्च होता है।

क्यों बनाया जाता है डिप्टी सीएम? ✅ गठबंधन सहयोगियों को संतुष्ट करने के लिए। ✅ क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए। ✅ जातीय या धार्मिक समीकरण साधने के लिए। ✅ चुनाव में वादों को पूरा करने के लिए।

निष्कर्ष: डिप्टी सीएम का पद भले ही संवैधानिक न हो, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व बेहद बड़ा होता है। यह पद संतुलन साधने का काम करता है, जबकि कैबिनेट मंत्री प्रत्यक्ष कार्यकारी भूमिका निभाते हैं। दोनों पदों का महत्व अपनी जगह है, लेकिन मुख्यमंत्री के बाद सबसे प्रमुख चेहरा डिप्टी सीएम होता है।